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|
Mannschaft |
1 |
2 |
3 |
4 |
5 |
6 |
7 |
8 |
9 |
10 |
MP |
BP |
| 1 |
SC 1934 Gelnhausen |
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|
5 |
6 |
|
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|
4 |
11 |
| 2 |
Kasseler SK 1876 |
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|
5 |
|
|
|
5 |
|
4 |
10 |
| 3 |
SK 1858 Gießen 2 |
|
|
|
|
|
|
|
5 |
|
4,5 |
4 |
9,5 |
| 4 |
SK Turm Bad Hersfeld |
|
|
|
|
|
|
4 |
|
6 |
|
3 |
10 |
| 5 |
SC Bad Nauheim |
|
3 |
|
|
|
|
|
|
|
6,5 |
2 |
9,5 |
| 6 |
SC Fulda |
3 |
|
|
|
|
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|
5 |
|
|
2 |
8 |
| 7 |
Sfr. Korbach |
2 |
|
|
4 |
|
|
|
|
|
|
1 |
6 |
| 8 |
SK Niederbrechen 1948 |
|
|
3 |
|
|
3 |
|
|
|
|
0 |
6 |
| 9 |
SV CAISSA e. V. Kassel |
|
3 |
|
2 |
|
|
|
|
|
|
0 |
5 |
| 10 |
SV "Lahn" Limburg |
|
|
3,5 |
|
1,5 |
|
|
|
|
|
0 |
5 |
| 2.Runde |
|
28. September 2008 |
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|
| SK Turm Bad Hersfeld |
- |
Sfr. Korbach |
4 |
- |
4 |
| SC Fulda |
- |
SC 1934 Gelnhausen |
3 |
- |
5 |
| SK 1858 Gießen 2 |
- |
SK Niederbrechen 1948 |
5 |
- |
3 |
| SC Bad Nauheim |
- |
SV "Lahn" Limburg |
6,5 |
- |
1,5 |
| SV CAISSA e. V. Kassel |
- |
Kasseler SK 1876 |
3 |
- |
5 |
|
SK Turm Bad Hersfeld |
|
Sfr. Korbach |
|
|
|
|
| Brett 1 |
Frank, Wolfgang |
|
Kearns, Christopher |
|
0,5 |
|
0,5 |
| Brett 2 |
Schmidt, Markus |
|
Lages, Karl Heinz |
|
0 |
|
1 |
| Brett 3 |
Krauße, Eckhard |
|
Rymar, Evgeniy |
|
0,5 |
|
0,5 |
| Brett 4 |
Marth, Jürgen |
|
Behle, Karl-Heinz |
|
0 |
|
1 |
| Brett 5 |
Frank, Thomas |
|
Zioltkowski, Jan |
|
1 |
|
0 |
| Brett 6 |
Willich, Manfred |
|
Trienekens, Tjark |
|
1 |
|
0 |
| Brett 7 |
Günther, Jörk |
|
Shkolnyk, Boris |
|
0 |
|
1 |
| Brett 8 |
Keßler, Paul |
|
Käding, Dieter |
|
1 |
|
0 |
4:4 nach spannendem Kampfverlauf
Paul Keßler brachte die Hersfelder nach nech einem Sieg im
Turmendspiel in Führung. Kurz darauf einigten sich an Spitzenbrett
Wolfgang Frank und Christopher Kearns auf remis Danach hab ich bis zur
Zeitkontrolle vom Kampfverlauf nichts mehr mitbekommen, da meine eigene
Partie recht turbulent zuging und mich voll in Anspruch nahm. Nach
überstandener Zeitnotphase stand der Wettkampf 2,5 : 2,5. Gespielt
wurde noch an den Brettern 3,5 und 7.
Tkomas Frank konnte die Hersfelder erneut in Führung bringen, aber
Jörk Günther konnte seine Stellung nicht halten und den
Korbachern wieder den Ausgleich zum 3,5 : 3,5 ermöglichen.
Es war nun die Partie Rymar vs Krauße die über den
Ausgang des Wettkampfes entscheiden sollte. Diese Partie
ging ein zweites mal in die Zeitnotphase und mündete nach etwas
wechselvollenm Verlauf in einen Dauerschach.
Eckhard Krauße
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